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Tu Zinda Hai - From "Padatik"

Arijit Singh/Sonu Nigam/Salil Chowdhuryhuatong
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तू ज़िंदा है तो ज़िंदगी की जीत में यक़ीन कर

अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर

तू ज़िंदा है...

ये ग़म के और चार दिन, सितम के और चार दिन

ये दिन भी जाएँगे गुज़र, गुज़र गए हज़ार दिन

ये ग़म के और चार दिन, सितम के और चार दिन

ये दिन भी जाएँगे गुज़र, गुज़र गए हज़ार दिन

कभी तो होगी इस चमन पे भी बहार की नज़र

अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर

तू ज़िंदा है...

तू ज़िंदा है तो ज़िंदगी की जीत में यक़ीन कर

अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर

तू ज़िंदा है...

सुबह और शाम के रंगे हुए गगन को चूम कर

तू सुन, ज़मीन गा रही है कब से झूम-झूम कर

सुबह और शाम के रंगे हुए गगन को चूम कर

तू सुन, ज़मीन गा रही है कब से झूम-झूम कर

तू आ मेरा सिंगार कर, तू आ मुझे हसीन कर

अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर

तू ज़िंदा है...

तू ज़िंदा है तो ज़िंदगी की जीत में यक़ीन कर

अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर

तू ज़िंदा है...

हज़ार भेस धर के आई मौत तेरे द्वार पर

मगर तुझे ना छल सकी, चली गई वो हार कर

हज़ार भेस धर के आई मौत तेरे द्वार पर

मगर तुझे ना छल सकी, चली गई वो हार कर

नई सुबह के संग सदा तुझे मिली नई उमर

अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर

तू ज़िंदा है...

तू ज़िंदा है तो ज़िंदगी की जीत में यक़ीन कर

अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर

तू ज़िंदा है...

बुरी है आग पेट की, बुरे हैं दिल के दाग़ ये

ना दब सकेंगे, एक दिन बनेंगे इंक़लाब ये

बुरी है आग पेट की, बुरे हैं दिल के दाग़ ये

ना दब सकेंगे, एक दिन बनेंगे इंक़लाब ये

गिरेंगे ज़ुल्म के महल, बनेंगे फिर नवीन घर

अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर

तू ज़िंदा है...

तू ज़िंदा है तो ज़िंदगी की जीत में यक़ीन कर

अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर

तू ज़िंदा है...

तू ज़िंदा है तो ज़िंदगी की जीत में यक़ीन कर

अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर

तू ज़िंदा है...

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