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Jaan Se Guzarte Hain

Shashwat Sachdev/Khan Saabhuatong
Diunggah oleh bluffalo1
दिल पे ज़ख़्म खाते हैं, जान से गुज़रते हैं

दिल पे ज़ख़्म खाते हैं, जान से गुज़रते हैं

दिल पे ज़ख़्म खाते हैं, जान से गुज़रते हैं

दिल पे ज़ख़्म खाते हैं, जान से गुज़रते हैं

जुर्म सिर्फ़ इतना है

जुर्म सिर्फ़ इतना है, उनको प्यार करते हैं

ऐतबार बढ़ता है और भी मोहब्बत का

ऐतबार बढ़ता है और भी मोहब्बत का

जब वो अजनबी बन कर पास से गुज़रते हैं

दिल पे ज़ख़्म खाते हैं, जान से गुज़रते हैं

दिल पे ज़ख़्म खाते हैं

वो जो फेर कर नज़रें पास से गुज़रते हैं

(वो जो फेर कर नज़रें पास से गुज़रते हैं)

ऐ ग़म-ए-ज़माना, हम तुझको याद करते हैं

दिल पे ज़ख़्म खाते हैं, जान से गुज़रते हैं

दिल पे ज़ख़्म खाते हैं, जान से गुज़रते हैं

(दिल पे ज़ख़्म खाते हैं, जान से गुज़रते हैं)

जुर्म सिर्फ़ इतना है, उनको प्यार करते हैं

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