बिंदिया छिपाये रे लाली चुनर
ओड़ के मूंद के मुखड़ा अपना
निकली अंधेरे में दुनियां के डर से मैं सजना
बिंदिया छिपाये रे लाली चुनर
ओड़ के मूंद के मुखड़ा अपना
निकली अंधेरे मे दुनियां के डर से मैं सजना
रात बैरन हुई ओ रे साथिया
देख हालत मेरी आ लेकर जिया
हाय रे बंगले के पीछे तेरी बेरी के नीचे
हाय रे पिया आहा रे आहा रे आहा रे पिया
काँटा लगा हाय लगा
काँटा लगा
आई मुसीबत तो अब सोचती हूँ
मैं क्यूँ रह सकी ना तेरे बिन
सच ही तो कहती थीं सखिया फँसेगी तू एक दिन
आई मुसीबत तो अब सोचती हूँ
मैं क्यूँ रह सकी ना तेरे बिन
सच ही तो कहती थीं सखिया फँसेगी तू एक दिन
भूल तो हो गई जो किया सो किया
तू बचा ले बलम आज मेरा जिया
हाय रे बंगले के पीछे तेरी बेरी के नीचे
हाय रे पिया आहा रे आहा रे आहा रे पिया
काँटा लगा हाय लगा हा आजा हा राजा
बंगले के पीछे तेरी बेरी के नीचे
हाय रे पिया
बंगले के पीछे तेरी बेरी के नीचे
हाय रे पिया आहा रे आहा रे आहा रे पिया
काँटा लगा हाय लगा
काँटा लगा