बदलते मौसमो में यार ढूंढ़ते हो
दिल क टुकड़ो में तुम कांच ढूंढ़ते हो
कैसा flex और कैसी तेरी ये हमनशी
कैसा मौसम जब दाग बून्द में हो
निकला था अकेले मई जहां लूटने को
बेख़ौफ़ खड़ा था सागर क बीच जहाज डूबने को
या तो जीतेगा या हार चुम ले वो
सहिदी क नारे भी लगेंगे जब आवाज़ गूंजने दो
कैसे मई टूटू जब कंधो क बोज से भारी ये दिल में दर्द है
जो कभी भी रोते नहीं वही तो लोगो क नज़रो में मर्द है
They draw the line, and I'm just trynna cross that shit
They trynna blame
बस वही तो तेरे और मेरे में फड़क है
पैसा तो बाद की बात है
सोच ये आखरी रात है जिनको भी जाना था गए रहना था जिनको वो आज भी सात है
बुरे से बुरा वक्त कितने भी जीते पर सादगी याद है नाकामी से कल जो बने थे देख बने वो आज मिसाल है
टूटे सितारों ने गर्दिश क चादर में ताबीरें ढूंढे है
रिवायत नवाज़िश और क़ुरबत की दौड़े लगते क्यों झूठे है
राहे दिखादो, दर्द मिटादो
ले चल तू सात मुझको इस जहां से दूर
समंदर के नज़ारे देखा कश्ती ने लेहेरो में एक गीत है खुदा ने भी तुझ ही को समझा काबिल है तो सेहलो ये यही जीत है
सब हज़म कर हम हम कसम से वक्त दफ़न कर हम सबर से ले कदम अब वक्त बदल गए दर ख़तम अब दर्द घमंड है
जैसे ही निकलेंगे तारे फलक में
बादले फूटेंगे बरसेंगे दर्द से
मुझे तू मिलना एक चाय की टपरी पे
मिलके हम जश्न मनाएंगे हक़ से
Till then I'm sowing the seeds
कोई भी फल का मुश्ताबिल है जड़ पे
खिलेंगे बाग भी काटो के साथ ही और मैना भी जाएगी हक़ से soo
कितने मआशरे अल्फाज़ो से ही फूकते है
कितने आतिशो क साथ ही हम झूमते है
सादगी के साथ ही हम आज भी तो लाज़मी की सात देना आता तो फिर दुश्मनी भी खून में है
क्यों मैं बनूँगा हमदर्द
किसी से मिला नहीं दस्तक
कलम में जान है जबतक
खुदा कसम मई घिसूंगा तबतक
हाथ दो चढ़ेंगे सर पर इनकी भी गलती नहीं ये देखे नहीं बंजर
Well I am that man जिसने पहले ही गाने में देदी थी मंज़र
So ain't no shit to give, I ain't no मुन्तज़िर कश्ती बेख़ौफ़ है खड़ा इन लेहेरो में लड़ने को आगे है पूरा समंदर
टूटे सितारों ने गर्दिश क चादर में ताबीरें ढूंढे है
रिवायत नवाज़िश और क़ुरबत की दौड़े लगते क्यों झूठे है
राहे दिखादो, दर्द मिटादो
ले चल तू सात मुझको इस जहां से दूर
समंदर के नज़ारे देखा कश्ती ने लेहेरो में एक गीत है खुदा ने भी तुझ ही को समझा काबिल है तो सेहलो ये यही जीत है
टूटे सितारों ने गर्दिश क चादर में ताबीरें ढूंढे है
रिवायत नवाज़िश और क़ुरबत की दौड़े लगते क्यों झूठे है