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Archit/Smithuatong
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कहीं तस्वीरों में छुपे, कहीं बंदिशों से घिरे

कहीं आँसुओं में बहे ये पल

सपने चमचमाते हुए, तारे टिमटिमाते हुए

थोड़े खिलखिलाते हुए ये पल

दिखलाए जो मुझे तेरी रूह के नज़ारे

समझाए वो मुझे, मेरी ख़ुशियाँ कह रही

हाँ, तू ही, हाँ, तू ही है मेरे दिल की दास्ताँ

बता तू, बता तू, क्यूँ तन्हा मैं रहा?

हाँ, तू ही, हाँ, तू ही है मेरे दिल की दास्ताँ

बता तू, बता तू मुझको

तू है कहाँ? तू है कहाँ?

तू है कहाँ? तू है कहाँ?

तू आसमाँ, मैं ज़मीं

(मुझसे तू आके मिल)

सारा जहाँ है यहीं

तू चाँद है, मैं तेरी

(बन जाऊँ रोशनी)

दिखलाए जो मुझे तेरी रूह के नज़ारे

समझाए वो मुझे, मेरी ख़ुशियाँ कह रही

हाँ, तू ही, हाँ, तू ही है मेरे दिल की दास्ताँ

बता तू, बता तू, क्यूँ तन्हा मैं रहा?

हाँ, तू ही, हाँ, तू ही है मेरे दिल की दास्ताँ

बता तू, बता तू मुझको

तू है कहाँ? तू है कहाँ?

तू है कहाँ? तू है कहाँ?

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