लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है वही आग सीने में फिर जल पड़ी है लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है कुछ ऐसे ही दिन थे वो जब हम मिले थे चमन में नहीं फूल दिल में खिले थे वही तो है मौसम मगर रुत नहीं वो मेरे साथ बरसात भी रो पड़ी है लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है कोई काश दिल पे ज़रा हाथ रख दे मेरे दिल के टुकड़ों को एक साथ रख दें मगर ये है ख्वाबों ख्यालों की बातें कभी टूट कर चीज़ कोई जुडी है लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है वही आग सीने में फिर जल पड़ी है लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है
लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है वही आग सीने में फिर जल पड़ी है लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है कुछ ऐसे ही दिन थे वो जब हम मिले थे चमन में नहीं फूल दिल में खिले थे वही तो है मौसम मगर रुत नहीं वो मेरे साथ बरसात भी रो पड़ी है लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है कोई काश दिल पे ज़रा हाथ रख दे मेरे दिल के टुकड़ों को एक साथ रख दें मगर ये है ख्वाबों ख्यालों की बातें कभी टूट कर चीज़ कोई जुडी है लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है वही आग सीने में फिर जल पड़ी है लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है
लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है वही आग सीने में फिर जल पड़ी है लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है कुछ ऐसे ही दिन थे वो जब हम मिले थे चमन में नहीं फूल दिल में खिले थे वही तो है मौसम मगर रुत नहीं वो मेरे साथ बरसात भी रो पड़ी है लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है कोई काश दिल पे ज़रा हाथ रख दे मेरे दिल के टुकड़ों को एक साथ रख दें मगर ये है ख्वाबों ख्यालों की बातें कभी टूट कर चीज़ कोई जुडी है लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है वही आग सीने में फिर जल पड़ी है लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है
लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है वही आग सीने में फिर जल पड़ी है लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है कुछ ऐसे ही दिन थे वो जब हम मिले थे चमन में नहीं फूल दिल में खिले थे वही तो है मौसम मगर रुत नहीं वो मेरे साथ बरसात भी रो पड़ी है लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है कोई काश दिल पे ज़रा हाथ रख दे मेरे दिल के टुकड़ों को एक साथ रख दें मगर ये है ख्वाबों ख्यालों की बातें कभी टूट कर चीज़ कोई जुडी है लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है वही आग सीने में फिर जल पड़ी है लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है